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नयी बात

शाम में पार्क में चहल-पहल रहती थी, कोई नयी बात नहीं थी। दोनों टहल रहे थे। "दादा जी प्रणाम, नमस्ते दादी जी", कहते कोई जॉगिंग करता हुआ गुज़रा। दादा जी थोड़ी ऊँची आवाज़ में बोले, "खूब खुश रहो"।